पाश्चात्य संस्कृति

Category:

Written by Rajesh Sharma

📅 March 29, 2021

पाश्चात्य संस्कृति और भारतीय संस्कृति क्या है, इनमें अंतर क्या है । पाश्चात्य संस्कृति कैसे लोगों को चरित्रभ्रस्ट एवं गर्त में फेक रही है ।

पाश्चात्य संस्कृति

यौवन ­­- हमारे देश का भविष्य हमारी युवा पीढ़ी पर निर्भर है किन्तु उचित मार्गदर्शन के अभाव में वह आज गुमराह हो रही है |
पाश्चात्य भोगवादी सभ्यता के दुष्प्रभाव से उसके यौवन का ह्रास होता जा रहा है | विदेशी चैनल, चलचित्र, अशलील साहित्य आदि प्रचार माध्यमों के द्वारा युवक-युवतियों को गुमराह किया जा रहा है | विभिन्न सामयिकों और समाचार-पत्रों में भी तथाकथित पाश्चात्य मनोविज्ञान से प्रभावित मनोचिकित्सक और ‘सेक्सोलॉजिस्ट’ युवा छात्र-छात्राओं को चरित्र, संयम और नैतिकता से भ्रष्ट करने पर तुले हुए हैं |

ब्रितानी औपनिवेशिक संस्कृति की देन इस वर्त्तमान शिक्षा-प्रणाली में जीवन के नैतिक मूल्यों के प्रति उदासीनता बरती गई है | फलतः आज के विद्यार्थी का जीवन कौमार्यवस्था से ही विलासी और असंयमी हो जाता है |

अमर्यादित मैथुन- पाश्चात्य आचार-व्यवहार के अंधानुकरण से युवानों में जो फैशनपरस्ती, अशुद्ध आहार-विहार के सेवन की प्रवृत्ति कुसंग, अभद्रता, चलचित्र-प्रेम आदि बढ़ रहे हैं उससे दिनोंदिन उनका पतन होता जा रहा है | वे निर्बल और कामी बनते जा रहे हैं | उनकी इस अवदशा को देखकर ऐसा लगता है कि वे ब्रह्मचर्य की महिमा से सर्वथा अनभिज्ञ हैं |

लाखों नहीं, करोड़ों-करोड़ों छात्र-छात्राएँ अज्ञानतावश अपने तन-मन के मूल ऊर्जा-स्रोत का व्यर्थ में अपक्षय कर पूरा जीवन दीनता-हीनता-दुर्बलता में तबाह कर देते हैं और सामाजिक अपयश  के भय से मन-ही-मन कष्ट झेलते रहते हैं | इससे उनका शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य चौपट हो जाता है, सामान्य शारीरिक-मानसिक विकास भी नहीं हो पाता | ऐसे युवान रक्ताल्पता, विस्मरण तथा दुर्बलता से पीड़ित होते हैं |

यही वजह है कि हमारे देश में औषधालयों, चिकित्सालयों, हजारों प्रकार की एलोपैथिक दवाइयों, इन्जेक्शनों आदि की लगातार वृद्धि होती जा रही है | असंख्य डॉक्टरों ने अपनी-अपनी दुकानें खोल रखी हैं फिर भी रोग एवं रोगियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है |

इसका मूल कारण क्या है ? दुर्व्यसन तथा अनैतिक, अप्राकृतिक एवं अमर्यादित मैथुन द्वारा वीर्य की क्षति ही इसका मूल कारण है | इसकी कमी से रोगप्रतिकारक शक्ति घटती है, जीवनशक्ति का ह्रास होता है |

पाश्चात्य संस्कृति से पाश्चात्य देशों की दुर्गति-  आँकड़े बताते हैं कि आज पाश्चात्य देशों में यौन सदाचार की कितनी दुर्गति हुई है ! इस दुर्गति के परिणामस्वरूप वहाँ के निवासियों के व्यक्तिगत जीवन में रोग इतने बढ़ गये हैं कि भारत से 10 गुनी ज्यादा दवाइयाँ अमेरिका में खर्च होती हैं जबकि भारत की आबादी अमेरिका से तीन गुनी ज्यादा है | मानसिक रोग इतने बढ़े हैं कि हर दस अमेरिकन में से एक को मानसिक रोग होता है | दुर्वासनाएँ इतनी बढ़ी है कि हर छः सेकण्ड में एक बलात्कार होता है ।

फ्री सेक्स के परिणाम- हर वर्ष लगभग 20 लाख कन्याएँ विवाह के पूर्व ही गर्भवती हो जाती हैं | मुक्त साहचर्य (free sex)  का हिमायती होने के कारण शादी के पहले वहाँ का प्रायः हर व्यक्ति जातीय संबंध बनाने लगता है | इसी वजह से लगभग 65% शादियाँ तलाक में बदल जाती हैं | मनुष्य के लिये प्रकृति द्वारा निर्धारित किये गये संयम का उपहास करने के कारण प्रकृति ने उन लोगों को जातीय रोगों का शिकार बना रखा है | उनमें मुख्यतः एड्स (AIDS) की बीमारी दिन दूनी रात चौगुनी फैलती जा रही है | वहाँ के पारिवारिक व सामाजिक जीवन में क्रोध, कलह, असंतोष, संताप, उच्छृंखलता, उद्यंडता और शत्रुता का महा भयानक वातावरण छा गया है | 

विश्व की लगभग 4% जनसंख्या अमेरिका में है | उसके उपभोग के लिये विश्व की लगभग 40% साधन-सामग्री (जैसे कि कार, टी वी, वातानुकूलित मकान आदि) मौजूद हैं फिर भी वहाँ अपराधवृति इतनी बढ़ी है की हर 10 सेकण्ड में एक सेंधमारी होती है, हर लाख व्यक्तियों में से 425 व्यक्ति कारागार में सजा भोग रहे हैं जबकि भारत में हर लाख व्यक्ति में से केवल 23 व्यक्ति ही जेल की सजा काट रहे हैं |

 भारतीय मनोविज्ञान से ही विश्व का मंगल

 जब पश्चिम के देशों में ज्ञान-विज्ञान का विकास प्रारम्भ भी नहीं हुआ था और मानव ने संस्कृति के क्षेत्र में प्रवेश भी नहीं किया था उस समय भारतवर्ष के दार्शनिक और योगी मानव मनोविज्ञान के विभिन्न पहलुओं और समस्याओं पर गम्भीरता पूर्वक विचार कर रहे थे | फिर भी पाश्चात्य विज्ञान की छ्त्रछाया में पले हुए और उसके प्रकाश से चकाचौंध वर्त्तमान भारत के मनोवैज्ञानिक भारतीय मनोविज्ञान का अस्तित्त्व तक मानने को तैयार नहीं हैं | यह खेद की बात है | 

भारतीय मनोवैज्ञानिकों ने चेतना के चार स्तर माने हैं : जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति और तुरीय | पाश्चात्य मनोवैज्ञानिक प्रथम तीन स्तर को ही जानते हैं | पाश्चात्य मनोविज्ञान नास्तिक है | भारतीय मनोविज्ञान ही आत्मविकास और चरित्र निर्माण में सबसे अधिक उपयोगी सिद्ध हुआ है क्योंकि यह धर्म से अत्यधिक प्रभावित है | भारतीय मनोविज्ञान आत्मज्ञान और आत्म सुधार में सबसे अधिक सहायक सिद्ध होता है | इसमें बुरी आदतों को छोड़ने और अच्छी आदतों को अपनाने तथा मन की प्रक्रियाओं को समझने तथा उसका नियंत्रण करने के महत्वपूर्ण उपाय बताये गये हैं | इसकी सहायता से मनुष्य सुखी, स्वस्थ और सम्मानित जीवन जी सकता है |

पश्चिम की मनोवैज्ञानिक मान्यताओं के आधार पर विश्वशांति का भवन खड़ा करना बालू की नींव पर भवन-निर्माण करने के समान है | पाश्चात्य मनोविज्ञान का परिणाम पिछले दो विश्वयुद्धों के रूप में दिखलायी पड़ता है | यह दोष आज पश्चिम के मनोवैज्ञानिकों की समझ में आ रहा है | जबकि भारतीय मनोविज्ञान मनुष्य का दैवी रूपान्तरण करके उसके विकास को आगे बढ़ाना चाहता है | उसके ‘अनेकता में एकता’ के सिद्धांत पर ही संसार के विभिन्न राष्ट्रों, सामाजिक वर्गों, धर्मों और प्रजातियों में सहिष्णुता ही नहीं, सक्रिय सहयोग उत्पन्न किया जा सकता है | भारतीय मनोविज्ञान में शरीर और मन पर भोजन का क्या प्रभाव पड़ता है इस विषय से लेकर शरीर में विभिन्न चक्रों की स्थिति, कुण्डलिनी की स्थिति, वीर्य को ऊर्ध्वगामी बनाने की प्रक्रिया आदि विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई है |

पाश्चात्य मनोविज्ञान मानव-व्यवहार का विज्ञान है | भारतीय मनोविज्ञान मानस विज्ञान के साथ-साथ आत्मविज्ञान है | भारतीय मनोविज्ञान इन्द्रियनियंत्रण पर विशेष बल देता है जबकि पाश्चात्य मनोविज्ञान केवल मानसिक क्रियाओं या मस्तिष्क-संगठन पर बल देता है | उसमें मन द्वारा मानसिक जगत का ही अध्ययन किया जाता है | उसमें भी प्रायड का मनोविज्ञान तो एक रुग्ण मन के द्वारा अन्य रुग्ण मनों का ही अध्ययन है जबकि भारतीय मनोविज्ञान में इन्द्रिय-निरोध से मनोनिरोध और मनोनिरोध से आत्मसिद्धि का ही लक्ष्य मानकर अध्ययन किया जाता है | पाश्चात्य मनोविज्ञान में मानसिक तनावों से मुक्ति का कोई समुचित साधन परिलक्षित नहीं होता जो उसके व्यक्तित्व में निहित निषेधात्मक परिवेशों के लिए स्थायी निदान प्रस्तुत कर सके | इसलिए प्रायड के लाखों बुद्धिमान अनुयायी भी पागल हो गये | संभोग के मार्ग पर चलकर कोई भी व्यक्ति योगसिद्ध महापुरुष नहीं हुआ | उस मार्ग पर चलनेवाले पागल हुए हैं | ऐसे कई नमूने हमने देखे हैं | इसके विपरीत भारतीय मनोविज्ञान में मानसिक तनावों से मुक्ति के विभिन्न उपाय बताये गये हैं यथा योगमार्ग, साधन-चतुष्टय, शुभ-संस्कार, सत्संगति, अभ्यास, वैराग्य, ज्ञान, भक्ति, निष्काम कर्म आदि | इन साधनों के नियमित अभ्यास से संगठित एवं समायोजित व्यक्तित्व का निर्माण संभव है | इसलिये भारतीय मनोविज्ञान के अनुयायी पाणिनि और महाकवि कालिदास जैसे प्रारम्भ में अल्पबुद्धि होने पर भी महान विद्वान हो गये | भारतीय मनोविज्ञान ने इस विश्व को हजारों महान भक्त समर्थ योगी तथा ब्रह्मज्ञानी महापुरुष दिये हैं |

अतः पाशचात्य मनोविज्ञान को छोड़कर भारतीय मनोविज्ञान का आश्रय लेने में ही व्यक्ति, कुटुम्ब, समाज, राष्ट्र और विश्व का कल्याण निहित है |

0 Comments

Related Articles

What is New Farm Bill 2020

What is New Farm Bill 2020

What is New Farm Bill 2020 means forcing the farmers to sell the crop to corporate companies. This is the main hidden agenda. What is New Farm Bill 2020 Slavery:  All the three farm laws passed recently aim at abolishing mandis (operated under the APMC law of the...

read more

New Articles

EVM Rahasy Va Sajish | EVM रहस्य व साजिश

EVM Rahasy Va Sajish | EVM रहस्य व साजिश

जानबूझकर EVM से चुनाव कराये जाते है क्योकि एलिड्स लोगों का यह मुख्य हथियार है ताकि मनचाही सरकार बना सकें यह EVM Rahasy Va Sajish है । EVM Rahasy Va Sajish | EVM रहस्य व साजिश भारत की संसद में EVM अनेक बार असफल हुई है, जिससे सांसदों कोे अपने मत देने में बड़ी कठिनाइयाँ...

read more
EVM ka Bahishkar | EVM का बहिस्कार | EVM Boycott

EVM ka Bahishkar | EVM का बहिस्कार | EVM Boycott

विकसित देशों ने EVM ka Bahishkar कर दिया है तथा पुनः कागजी मतपत्र प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि स्पस्टता रहे । छेडछाड के बारे मे समझेगें । EVM ka Bahishkar | EVM का बहिस्कार | EVM Boycott इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को अमेरिका, जर्मनी, हॉलैंड इत्यादि विकसित देशों में...

read more
Electronic Voting Machine EVM- इलेक्ट्राॅनिक वोटिंग मशीन EVM क्या है ?

Electronic Voting Machine EVM- इलेक्ट्राॅनिक वोटिंग मशीन EVM क्या है ?

Electronic Voting Machine EVM क्या है, कैसे काम करता है तथा इसका इतिहास क्या है । यह कैसे हैक किया जाता है तथा भारत में इसकी क्या स्थिति है । Electronic Voting Machine EVM- इलेक्ट्राॅनिक वोटिंग मशीन EVM क्या है ? भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। इस देश में एक दशक...

read more
Media ka Vyabhichar | मीडिया का व्यभिचार- फैशन, सेक्स व विज्ञापन

Media ka Vyabhichar | मीडिया का व्यभिचार- फैशन, सेक्स व विज्ञापन

आज सुबह से लेकर शाम तक मीडिया में पाश्चात्य कचरा फैशन, सेक्स, ग्लैमर आदि को प्रमुखता दी जा रही हैं जो Media ka Vyabhichar है । इस पर चर्चा करेगें । Media ka Vyabhichar- फैशन, सेक्स व विज्ञापन आज सुबह से लेकर शाम तक मीडिया के लेखों और कार्यक्रमों में पाश्चात्य कचरा...

read more
Rashtradrohi Media | राष्ट्रद्रोही मीडिया | Anti National Media

Rashtradrohi Media | राष्ट्रद्रोही मीडिया | Anti National Media

Rashtradrohi Media का इस देश की अखंडता, सभ्यता और संस्कृति पर बड़ा प्रहार है। देशहित के मुद्दों का गला घोटा जा रहा है । Rashtradrohi Media | राष्ट्रद्रोही मीडिया | Anti National Media आज भारत में यह विदेशी मीडिया असत्य की महिमा गाकर देश की विचारधारा को बदलने और बनाने...

read more