Gau ki Mahima Mahan | गौ की महिमा महान

Written by Rajesh Sharma

📅 February 23, 2022

Gau ki Mahima Mahan

Gau ki Mahima Mahan है, जो कि सूर्य-अवकाशीय कई तत्त्वों को शरीर में दूध, गोझरण तथा गोबर के द्वारा हमें देता है । इसे यहाँ समझेगें ।

Gau ki Mahima Mahan | गौ की महिमा महान

* गौमाता के दर्शन एवं गाय के खुरों की धूलि मस्तक पर लगाने से भाग्य की रेखाएँ बदल जाती हैं, घर में सुख-समृद्धि एवं शांति बनी रहती है।

* जहाँ पर गौएँ रहती हैं उस स्थान को तीर्थभूमि कहा गया है, ऐसी भूमि में जिस मनुष्य की मृत्यु होती है उसकी तत्काल सद्गति हो जाती है, यह निश्चित है । – (ब्रह्मवैवर्तपुराण,श्रीकृष्णजन्म खंड : 21.91-93)

* गो-ग्रास देने तथा गाय की परिक्रमा करने से मनोकामना सिद्ध होती है, धन-संपदा स्थिर रहती है तथा अभीष्ट की प्राप्ति होती है।

* गाय को प्रेम से सहलाने से ग्रहबाधा, पीड़ा, कष्ट आदि दूर होते हैं ।

* गौ के शरीर के रोम-रोम से गूगल जैसी पवित्र सुगंध आती है। उसके शरीर से अनेक प्रकार की वायु निकलती है जो वातावरण को जंतुरहित करके पवित्र बनाती है ।

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  1. गौमूत्र चिकित्सा
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  3. गौ आधारित कृषि क्या है ?

यज्ञ से जीवन रक्षा

देशी गाय के गोबर के  कण्डों पर गाय का घी, जौ, तिल, चावल और मिश्री अथवा शक्कर डालकर हवन किया जाता है तो महत्वपूर्ण गैसें उत्पन्न होती हैं । उनमें से एक प्रोपिलीन ऑक्साईड गैस बरसात लाने में सहायक होती है । ‘इथिलीन ऑक्साइड’ का गैस संक्रामक रोगों में एवं जीवनरक्षक  दवाओं के रूप में प्रयोग होता है। इससे पर्यावरण शुद्ध, पवित्र तथा आरोग्यप्रद बनता है । इसलिए प्राचीन काल में अपने पूर्वज, राजा-महाराजा, ऋषि-मुनि, संत-महात्मा निरंतर अश्वमेध, विष्णुयाग, सहस्रकुंडी इत्यादि यज्ञ करते रहते थे। इससे खूब वर्षा होती थी व पर्यावरण शुद्ध और पवित्र होता था, महामारियाँ भी नहीं फैलती थीं ।

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  1. गौरक्षा में हमारा योगदान क्या हो
  2. गोमांस खाने से बिमारी क्या होती है
  3. गौ की वैज्ञानिक महत्ता क्या है ?

अवकाशीय ऊर्जा  (cosmic energy) का संग्राहक :

अंतरिक्ष में असंख्य तारे, नक्षत्र, सूर्य, चन्द्र, ग्रह, उपग्रह और असंख्य आकाशगंगाएँ हैं। आकाश से दिन-रात अनेक प्रकार की ऊर्जा की वर्षा पृथ्वी पर होती रहती है। उस ऊर्जा को झेलने का कार्य गौ के सींग करते हैं। गाय के सींगों का आकार पिरामिड जैसा होता है। यह एक शक्तिशाली ‘एन्टेना’ है। सींगों की मदद से गौ सभी अवकाशीय ऊर्जाओं को शरीर में संचित कर लेती है और वही ऊर्जा हमें गोझरण, दूध और गोबर के द्वारा देती है। इसके अलावा गाय की पीठ पर ककुद (डिल्ला) होता है जो कि सूर्य-अवकाशीय कई तत्त्वों को शरीर में दूध, गोझरण तथा गोबर के द्वारा हमें देता है। गोमूत्र अवकाशीय ऊर्जा का भंडार है । For More Information: https://srsinternational.org/gau-raksha-ek-andolan-multi-languages

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