Javaharlal Neharu ka Deshdroh | जवाहरलाल नेहरु का देशद्रोह

Written by Rajesh Sharma

📅 February 8, 2022

Javaharlal Neharu ka Dshdroh

सुरा- सुन्दरियों में चूर होकर नेहरू ने जो नये भारत की नींव डाली वहीं नींव आज भारत का दागदार ललाट बन चुकी है जो Javaharlal Neharu ka Deshdroh है ।

Javaharlal Neharu ka Deshdroh | Treason of Jawaharlal Nehru

वरिष्ठ पत्रकार डॉ. रामप्रसाद मिश्र ने जवाहरलाल नेहरू को स्वतंत्र भारत का शोक कहा है । सुरा और सुन्दरियो मे चूर होकर नेहरू ने जो नये भारत की नींव डाली थी वहीं नींव आज भारत का दागदार ललाट बन चुकी है । नेहरू ने अपनी सत्ता के लालच में पकिस्तान बना दिया और कश्मीर को देशद्रोहियों और आतंकवादियों के हवाले कर दिया, चीन से दोस्ती के नाम पर भारत के बहादुर सैनिकों को अंतिम समय तक आगे बढ़ने से रोके रखा और इस कारण से आज तक हज़ारों वर्गकिलोमीटर भारत की जमीन पर चीन का कब्ज़ा है ।

आज देश में जो आतंकवाद, कश्मीर की समस्या, राष्ट्रभाषा हिन्दी की उपेक्षा आदि इन सभी समस्याओं का जनक जवाहर लाल नेहरू है । आगे नेहरू वंश ने ‘बांटो और राज करो’ की नीति का घिनौना प्रयोग कर सफलता प्राप्त की। राष्ट्र को हिन्दू-मुसलमान, ईसाई, सिक्ख, बौद्ध इत्यादि में बुरी तरह खण्डित किया, साथ ही हिन्दुओं का आर्य-द्रविण-सवर्ण-पिछड़ा-आदिवासी वर्गो में विभक्त किया ।

नेहरू कैसे बना प्रधानमंत्री !

कांग्रेस में नेहरू को कोई पसंद नहीं करता था किन्तु नेहरू को पसंद करने वालों में सबसे ऊपर थे अंग्रेज और उन्हीं अंग्रेजों का नुमाइंदा था माउंट बैटन । माउंट बैटन को भारत भेजने का मुख्य कारण ही यह था कि काले अंग्रेज नेहरू को फाँसना चाहते थे और यह काम किया माउंट बैटन और उसकी पत्नी ने । नेहरू कोई जन नेता नहीं था उसे तो अंग्रेजों ने मीडिया द्वारा प्रचारित किया और उसकी उज्ज्वल छवि बनानी चाही क्योंकि सभी अंग्रेज नेहरूे के बारे में कहा करते थे कि यह आदमी शरीर से भारतीय है किन्तु इसकी आत्मा बिल्कुल अंग्रेज है ।

अंग्रेज भारत छोड़ भी दें तो नेहरू अंग्रेजों का शासन और उनके कानून भारत में चलाता रहेगा और भारत हमेशा के लिये ब्रिटेेन का उपनिवेश (British Domenion State) बनकर रहेगा। कांग्रेस कार्यकारिणी के चुनावों में प्रधानमंत्री पद के लिए हुए चुनाव में 15 में से 14 वोट सरदार पटेल के पक्ष में पड़े थे और 1 वोट नेहरू के पक्ष में । चुनाव हारने के बाद जब नेहरू को लगा कि अब मेरी दाल नहीं गलने वाली है तो वह गांधी जी के पास गया और उन्हें धमकाया । गांधी जी ने सरदार पटेल को एक पत्र द्वारा पटेल से अपना नाम प्रधान मंत्रीपद के उम्मीदवार से वापस लेने की प्रार्थना की और यह पत्र आप चाहें तो देख सकते हैं । जो यह Javaharlal Neharu ka Dshdroh है ।

सत्तालोलुप जवाहरलाल नेहरु  अंग्रेजों की सत्ता का उत्तराधिकारी बना और उसने  देश को आजाद नहीं होने दिया। किसी भी राष्ट्र में कानून का स्रोत विदेशी शासन में बने कानून और रची गयी प्रथाएँ नहीं है। यह सब नेहरु और अंग्रेजों की करतूत है । नेहरु खुद कहते थे ‘ मैं शिक्षा से अंग्रेज हूँ संस्कृति से मुसलमान और किसी दुर्घटनावश हिन्दू बना हूँ । ’

चन्द्रशेखर आजाद को धोखे से मरवाने वाला नेहरू यह Javaharlal Neharu ka Deshdroh है

चंद्रशेखर आजाद की मौत से जुड़ी फाइल आज भी लखनऊ के सीआइडी ऑफिस 1- गोखले मार्ग मे रखी है । उस फाइल को नेहरू ने सार्वजनिक करने से मना कर दिया था । इतना ही नहीं नेहरू ने उत्तरप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री गोविन्द वल्लभ पन्त को उस फाइल को नष्ट करने का आदेश दिया था । चूँकि पन्त जी खुद एक महान क्रांतिकारी रहे, इसलिए उन्होंने नेहरू को झूठी सुचना दी कि उस फाइल को नष्ट कर दिया गया है । क्या है उस फाइल में ? उस फाइल में इलाहाबाद के तत्कालीन पुलिस सुपरिटेन्डेंट मिस्टर नॉट वावर के बयान दर्ज है जिसकी अगुवाई मे ही पुलिस ने अल्फ्रेड पार्क मे बैठे आजाद को घेर लिया था और एक भीषण गोलीबारी के बाद आजाद शहीद हुए ।

नॉट वावर ने अपने बयान मे कहा है कि मैं खाना खा रहा था तभी नेहरू का एक संदेशवाहक आया उसने कहा कि नेहरू जी ने एक संदेश दिया है कि आपका शिकार अल्फ्रेड पार्क में है और तीन बजे तक रहेगा । मैं कुछ समझा नहीं फिर मैं तुरंत आनंद भवन भागा और नेहरू ने बताया कि अभी आजाद अपने साथियों के साथ आया था वह रूस जाने के लिए बारह सौ रुपये मांग रहा था मैंने उसे अल्फ्रेड पार्क में बैठने को कहा है । फिर मैंने बिना देरी किये पुलिस बल लेकर अल्फ्रेड पार्क को चारों ओर से घेर लिया और आजाद को आत्मसमर्पण करने को कहा । पांच गोली से आजाद ने हमारे पांच लोेगों को मारा फिर छठी गोली अपने कनपटी पर मार ली ।

आजाद नेहरू से मिलने क्यों गए थे ? इसके दो कारण थे भगत सिंह की फांसी की सजा माफ करवाना तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की लड़ाई को आगे जारी रखने के लिए रूस जाकर स्टालिन की मदद लेने की योजना ।

नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु का सच :

नेता जी सुभाषचन्द्र बोस विमान दुर्घटना में नही मारे गए । नेहरू ने ब्रिटिश सरकार को एक समझौता पत्र हस्ताक्षर करके सौंप दिया कि अगर नेता जी भारत आये तो उन्हें बंदी बना करके ब्रिटिश सरकार को सौंप दिया जायेगा ।

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