Jyotish ki Parampara | ज्योतिष की ज्योतिर्मय परम्परा

Written by Rajesh Sharma

📅 April 26, 2022

Jyotish ki Parampara

Jyotish ki Jyotirmay Parampara विज्ञान के रूप में किसने प्रस्तुत किया इसकी जानकारी यहाँ पढने को मिलेगी पंचाग क्या है और किसने शुरु किया आदि ।

Jyotish ki Jyotirmay Parampara

liturgical Tradition of Astrology

Jyotish ki Jyotirmay Parampara | ज्योतिष की ज्योतिर्मय परम्परा

वेदा हि यज्ञार्थमभिप्रवृत्ता: कालानुपूर्वा विहिताश्च यज्ञा:  ।

तस्मादिदं कालविधानशास्त्रं वेद स वेद यज्ञम्  ।।

                                               – वेदांग ज्योतिष, याजुष श्लोक 3

Jyotish ki Jyotirmay Parampara | ज्योतिष की ज्योतिर्मय परम्परासूर्य उदय होता है न अस्त होता है, सौरमंडल के विभिन्न ग्रह, चन्द्रमा-सूर्य से प्रकाशित हैं,

पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है, पृथ्वी पहले जलमग्न थी,

पृथ्वी की गति पश्चिम से पूर्व की ओर आकर्षण शक्ति, ज्वार-भाटा,

चन्द्रमा की आकर्षण शक्ति का परिणाम, विभिन्न नक्षत्र, विषुवत रेखा,

सूर्य की उत्तरायण- दक्षिणायन गति, बारह राशियाँ

ऐसे अनेक तथ्य वेदकाल में ऋषियों ने जानकर वेद के काव्यात्मक रूप से मानवता को दे दी थी । कालान्तर में आर्यभट्ट, वराहमिहिर, भास्कराचार्य, ब्रह्मगुप्त, श्रीधर  आदि ज्योतिषियों ने विज्ञान के रूप में इसे पुन: प्रस्तुत किया । उत्तर सामने रखे हुए हैं । पुरातत्व को ही प्रमाण माननेवालों के सामने यह प्रश्न है कि आखिर बिना आधुनिक वैज्ञानिक यंत्रों के ये बातें कैसे जानी गई ?

Jyotish ki Parampara में

भारतीय कालसूचक- पंचांग | Indian Chronology – Panchang

जिसे कर्मकांड का रूप देकर आम जनमानस से जोड़ दिया गया ।

भारत में नक्षत्र विज्ञान पश्चिमी देशों की तरह अपने आप में स्वतंत्र विषय नहीं होकर कृषि, आयुर्वेद, गणित सभी से जुड़ा रहा । माना जाता है कि कृषि एवं यज्ञ आदि के उद्देश्य से पंचांग की रचना हुई । इसमें कालगणना के अतिरिक्त मुहूर्त, फलादेश आदि पाँच अंग शामिल हैं, इसलिए इसे पंचांग कहा जाता है । स नक्षत्र में कौन-सी फसल बोई जाए तथा किस फसल की कब कटाई हो इस निमित्त स्वतंत्र रूप से कृषि पंचांग का विकास हुआ ।

Jyotish ki Jyotirmay Parampara | ज्योतिष की ज्योतिर्मय परम्पराग्रहों की गति, स्थिति, ग्रहण

उनका पृथ्वी के जीवन पर पड़नेवाला प्रभाव

और अनिष्ट प्रभावों से बचाव सभी

पंचांग के विषय रहे हैं ।

बाद में कर्मकांड के बढ़ जाने से

इसका धार्मिक महत्व

वैज्ञानिकता पर हावी हो गया ।

Jyotish ki Jyotirmay Parampara | ज्योतिष की ज्योतिर्मय परम्पराराजा जयसिंह के समय

ग्रहों को जानने-समझने

के लिए कई

वेधशालाएँ

निर्मित की गई ।

भारत में प्राचीनकाल से ही ग्रहों को देखने के लिए टेलीस्कोप (तुरीय यंत्र) होता था । उज्जैन स्थित श्री विष्णु श्रीधर वाकणकर के संग्रहालय में सैकड़ों वर्ष पुराने उत्तल लैंस रखे हैं, जो तुरीय यंत्र बनाने में प्रयोग किये जाते थे ।

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