हिन्दू संतों पर अत्याचार व षड्यंत्र



आये दिन सिर्फ और सिर्फ हिन्दू संतों के खिलाफ किये जाने वाले षड्यंत्र और विभिन्न झूठे मामलों में उन्हें बदनाम करके फँसाने व उन पर की जा रही कार्यवाई एक बड़े षड्यंत्र की ओर इशारा करती हैं । वेटिकन को अपना धर्मांतरण मिशन जारी रखने के लिए निर्बाध रास्ता चाहिए होता है। वेटिकन चर्च उस प्रत्येक संस्था से हाथ मिलाकर व सहयोग करके चलता है जो उसके उद्देश्यों की पूर्ति में सहायक होते हैं फिर चाहे वे राष्ट- विरोधी एन.जी.ओ. हों, राजनेता हों या शोषण करने वाली बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ ।
जब हिन्दू संतों को बदनाम करना होगा या समाचार चैनलों को खुद की दर्शक संख्या (टी.आर.पी.) बढ़ानी होगी उस समय तो उनके एंकर चीख-चीखकर टी.वी. का पर्दा फाड़ देंगे लेकिन जब वही संत अदालतों द्वारा बेदाग बरी कर दिये जाते हैं उस समय वही मीडिया अपने मुँह में दही जमाकर बैठ जाती हैं। माफीनामा भी पेश करते हैं तो चुपके-चुपके ।

नित्यानंद की सेक्स सी.डी. फर्जी पाये जाने पर न्यायालय ने मीडिया को जमकर लताड़ लगाई थी, उनसे माफीनामा भी दिलवाया गया । पुदुचेरी की एक अदालत ने शंकर रमन हत्याकांड मामले में कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती को निर्दोष बरी कर दिया । संत आसारामजी बापू पर तांत्रिक विधि के आरोप लगे, जिसको सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज करते हुए क्लीनचिट दी थी फिर भी मीडिया इस पर चुप्पी साध गई ।

संतों पर अत्याचार क्यों ? : सरकारी आँकड़ों के मुताबिक भारत में ईसाई मिशनरी संस्थाओं का जमीन पर कब्जा क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे अधिक है। 'चर्च' के पास 52 लाख करोड की भू-सम्पत्ति है । भारत में चर्च की कुल सम्पत्ति 13 लाख 71 हजार करोड़ है जिसमें खाली पड़ी ज़मीन शामिल नहीं है । ईसाई मिशनरियाँ छल कपट व लोभ-लालच के बल पर भोले-भाले हिन्दुओें का धर्मान्तरण कर रही हैं। अनेक पादरी बालकों के यौन शोषण में पकड़े जाते हैं व ननें गर्भवती हो जाती हैं। आज देश की दुर्दशा को देखते हुए हिन्दू संत अब धीरे-धीरे मुखर होने लगे हैं जिससे जनता जाग्रत हो रही है इसलिए इन संतों पर गाज गिरने लगी है।

भारत को पुनः गुलाम बनाने की साजिश में सरकार की भूमिका
भारत पोप के लिये सबसे 'सस्ता बाजार' है । खइचठ की रिपोर्ट के अनुसार भारत में किसी भी गरीब को ईसाई बनाने का खर्च दुनिया के किसी विकसित देश के मुकाबले 700 गुना सस्ता है । 'चर्च' दुनिया की सबसे बड़ी रोज़गार निर्माता 'कम्पनी' है । चर्च और पोप की सत्ता जिस 'प्रोफेशनल' तरीके से काम करती है, उसे देखकर बड़ी-बड़ी मल्टीनेशनल कम्पनियाँ भी शरमा जाय । जिस तरह बड़ी-बड़ी कम्पनियों में 'बिजनेस प्लान' बनाया जाता है, उसी तरह रोम में ईसाई धर्म के प्रचार के लिये 'वार-प्लान' बनाया जाता है ।

भारत में मतांतरण को लेकर चर्च की भूमिका काफी आक्रामक है । ''इंडिया विल बी क्राइस्ट लैंड'' यह उनकी पुरानी घोषणा है जिसके तहत संतों व संस्कृति को मिटाने का कार्य किया जा रहा है । भारतीयों को गुलाम बनाये रखने के लिए ब्रिटिश संसद में पास किया गया भारतीय संविधान, जो कि आज तक सिर्फ एक अधिनियम है, सत्ता लोलुप काले अंग्रेजो द्वारा चलाया जाता रहा है। ऐसी स्थिति में शोषण व अत्याचार होता ही रहेगा तथा संतो, मंदिरों, गाय व भारतीय संस्कृति का संरक्षण व विकास असम्भव है ।

नागालैंड, मिजोरम आदि से हिन्दुओं व उनके मंदिरो को नेस्तानाबुद कर दिया गया है । अगली कड़ी में उड़ीसा, केरल, आंध्र व तमिलनाडु में भी ऐसी स्थिति बनाई जा रही है । आज तक सरकार द्वारा 42 लाख 50 हजार मंदिरों का अधिग्रहण हुआ है, साथ ही संतों, समाज सेवकों आदि को जेल में रखा जा रहा है। सरकार द्वारा हर साल करोड़ों पशुओं का कत्ल कर मांस निर्यात को बढावा दिया जा रहा है ।

श्री लाल बहादुर शास्त्री, सरदार वल्लभ भाई पटेल, श्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसे सत्यनिष्ठ लोगों ने शासन व्यवस्था सँभाली लेकिन उसके बाद क्या ? विदेशी कम्पनियों द्वारा लूट, निर्दोषों को जेल, हिन्दी भाषा का पराभव किया जा रहा है । इन सबके लिए जिम्मेदार आज का संविधान, लागू अंग्रेजी व्यवस्था व कानून है । शासक बदलने से विकास नहीं होगा भारतीय भूमण्डल के अनुसार व्यवस्था, नीतियाँ बनाकर उसपर चलने से तथा भारतीय संस्कृति का अनुकरण कर संतों के मार्गदर्शन में चलने से ही सब कुछ ठीक होगा ।
संतों के खिलाफ षड्यंत्र - सिलसिलेवार अत्याचार


(1) निर्दोष शंकराचार्य पर लगाया हत्या का झूठा आरोप
कांची कामकोटि पीठ कई धार्मिक संस्थान, शिक्षा संस्थान, अस्पताल, वृद्ध लोगों के लिए घर और एक विश्वविद्यालय भी चलाती है । तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता की बेशर्म सरकार ने सन् 2004 की दीपावली की रात को निर्दोष शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती जी को गिरफ्तार कर प्रताड़ित किया। उन्हें अपराधियों की तरह पुलिस स्टेशन ले जाया गया था । मामले का ट्रायल करीब 9 साल तक चला । पांडिचेरी की एक अदालत ने शंकर रमन हत्याकांड मामले में कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य समेत सभी 23 आरोपियों को नवम्बर 2013 में बरी कर दिया । बिकाऊ मीडिया ने झूठा कुप्रचार किया था कि शंकराचार्यजी ने अपराध कबूल कर लिया है जबकि पुलिस ऐसा कोई सबूत नहीं दे पायी थी । राजनैतिक षड्यंत्र तो असफल हो गया पर शंकराचार्यजी को 2 माह तक जेल में रखा गया व सतत 9 वर्ष तक उनके मान-सम्मान को जो क्षति पहुँचायी गई उसकी भरपाई कौन करेगा ?


(2) साध्वी प्रज्ञा को अमानवीय प्रताड़ना
हिन्दू धर्मध्वजा को लहराने वाली साध्वी प्रज्ञासिंह ठाकुर को 2008 में हैदराबाद तथा मालेगाँव मस्जिद में बम ब्लास्ट का झूठा आरोप लगाकर जेल में डाल दिया । 6 अगस्त 2008 को पुलिस ने उन्हें धर्म भ्रष्ट करने का प्रयत्न किया । अमानुषिक अकथनीय अत्याचार करके विषैले इंजेक्शन आदि देकर लकवा का मरीज बना दिया गया । क्यों ? सिर्फ इसलिए कि वे धर्मांतरण के काम में बाधक बनती थीं । पिछले 6 वर्षों में लगातार उनका स्वास्थ्य गिरता रहा और उनकी परेशानियाँं बढ़ती चली गयीं और अब वह पांँव से चल भी नहीं पाती हैं । यू.पी. ए. सरकार की हठधर्मिता की वजह से पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी । उल्टा भगवा आतंकवाद की दलील देकर उन्हें जेल से छूटने तक नहीं दिया गया ।

बहुचर्चित सुनील जोशी की हत्या मामले में 6 साल बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने माना है कि पुलिस ने इस मामले में साध्वी प्रज्ञा सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर गलती की थी ।


(3) स्वामी नित्यानंद की बनाई गई फर्जी सेक्स सी.डी.
स्वामी नित्यानंद कर्नाटक में सनातन धर्म की अलख जगाये रखने तथा चर्च के धर्मांतरण के बढ़ते कदमों को थामने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं । उनका एक अभिनेत्री के साथ अंतरंग दृश्यों का फर्जी वीडियो प्रसारित किया जाता है । तत्काल बिकाऊ मीडिया उछल-उछलकर नित्यानंद सरस्वती के खिलाफ एक सुनियोजित अभियान चलाने लगता है । सन् 2010 में नित्यानंद इस मामले में 52 दिन तक जेल में रहे।

मीडिया ट्रायल कर-करके इस मामले में हिन्दू धर्म व भगवा वस्त्रों इत्यादि को भी जमकर कोसा गया । जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ा पता चला कि पुलिस और चैनलों को नित्यानंद की सी.डी. देकर आरोप लगाने वाला व्यक्ति 'कुरुप्पन लेनिन' एक धर्म-परिवर्तित ईसाई है । यह व्यक्ति पहले एक फिल्म स्टूडियो में काम कर चुका है तथा वीडियो मॉर्फिंग में कुशल है । जाँच में पता चला कि वह वीडियो नकली व बनावटी था ।

वीडियो में पाया गया व्यक्ति नित्यानंद नहीं है । न्यायालय ने स्टार टी.वी. और इसके उप चैनल (स्टारविजय) तथा आजतक को अपने चैनल पर लगातार प्रति घंटे माफीनामा चलाने का आदेश दिया । फर्जी सेक्स सी.डी. बनाने वाले लेनिन को गिरफ्तार कर लिया गया ।

स्वामी नित्यानंद के साथ कथित अश्लील हरकतों वाले फर्जी वीडियो से सुर्खियों में आयी तमिल अभिनेत्री रंजीता ने उनके साथ यौन-संबंध होने से इन्कार किया तथा टी.वी. चैनलों पर दिखाई गई फुटेज को फर्जी करार दिया है । अभिनेत्री रंजीता ने इसका रहस्योद्घाटन करते हुए कहा : इस साजिश के पीछे क्रिश्चियन मिशनरी का हाथ है ।


(4) योगाचार्य रामदेव को खत्म करने की साजिश
पहले 2005 में बाबा रामदेव पर आयुर्वेदिक दवा में केंचुआ तथा मनुष्य की खोपड़ी का चूर्ण मिलाने का झूठा आरोप लगाया गया । फिर जैसे ही बाबा रामदेव ने ईसाईयत के संरक्षकों और कांग्रेस पर उँगली उठाना शुरू किया उसी दिन से सत्ता के गलियारे में बैठे हुए अजगर अचानक जागृत हो गये । काले धन को वापस लाने की माँग इन अजगरों को इतनी नागवार गुजरी कि इन्होंने बाबा रामदेव के पीछे देश की सी.बी.आई. लगा डाली । बड़ी-बड़ी बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ तो बाबा रामदेव से पहले ही खार खाए बैठी थीं ।

4 जून 2011 को आधी रात को दिल्ली के रामलीला मैदान में सो रहे हजारों सत्याग्रहियों पर ईसाई सोनिया की पुलिस ने धावा बोल दिया । पुलिस उन पर लाठियाँ और आँसू गैस के साथ टूट पड़ती है । बाबा रामदेव को प्रताड़ित किया जाता है । बाबा रामदेव का कहना है कि रामलीला मैदान में सोनिया मेरा एन्काउन्टर कराना चाहती थी । मीडिया द्वारा बाबा रामदेव को ठग, चोर, भगोड़ा इत्यादि से विभूषित किया जाता है । बाबा रामदेव पर उनके गुरु की हत्या का झूठा आरोप भी लगाया जा रहा है ।
बाबा रामदेवजी के प्रमुख सहयोगी आयुर्वेदाचार्य बालकृष्णजी को पासपोर्ट के मामूली मामले में जेल में डाल दिया गया था ।


(5) स्वामी श्यामानंद को पिलाया नशीला पदार्थ
राजस्थान के स्वामी श्यामानंदजी के आश्रम की जमीन हड़पने के लिए उनको पेय में नशीली वस्तु मिलाकर पिलाया था । तत्पश्चात् खरीदी हुई लड़की के साथ नशे की हालत में अश्लील हरकतों की फिल्म बनाकर बदनाम किया । भक्तों ने उस महिला की ठौर पा कर उससे सच उगलवाया । जिससे षड्यंत्र की पोल खुल गई ।


(6) स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की निर्मम हत्या
ओड़िशा में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती ने अपना संपूर्ण जीवन वनवासियों के उत्थान में लगा दिया । इनके प्रयासों से चर्च के षड्यंत्र उजागर हो रहे थे । ईसाई मिशनरियों द्वारा किए जा रहे धर्म परिवर्तन के विरोध में कार्यरत 85 वर्षीय संत पर 24 अगस्त 2008 को उनकी छाती छलनी होने तक उन पर गोलियाँ चलायीं एवं कुल्हाड़े से उनके शरीर को काट डाला । स्वामीजी तथा उनके साथियों की हत्या के बाद जिन दोनों लोगों को ग्रामीणों ने खून से लथ-पथ हथियारों व नकाबों के साथ पकड़कर पुलिस के हवाले किया था पुलिस ने उन दोनों को बिना पूछताछ के छोड दिया । अभियुक्तों की पहचान परेड भी नहीं कराई गई । इसके अलावा वेटिकन चर्च में स्वामीजी की हत्या के लिए पारित प्रस्ताव वाले रजिस्टर की नक़ल भी पुलिस को उपलब्ध कराई गई थी । सरकार उस पर भी जांच नहीं कर रही है । स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती ने उनकी हत्या होने से पहले लगातार कई बार उनको मिली हुई धमकियों के बारे में प्रशासन को बताया लेकिन सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया ।

(7) निर्दोष चंद्रास्वामी को जेल मेें ठूँसा
फेरा कानून के उल्लंघन के मामले में चंद्रास्वामी को पटियाला हाऊस कोर्ट ने रिहा कर दिया था । यह मामला लंदन में विचाराधीन एक दूसरे मामले में वकील को करीब 14 हजार पौंड की फीस देने से संबंधित था । चंद्रास्वामी को 9 माह तक जेल में रहना पड़ा था और पुलिस ने भयंकर यातनायें दी थीं । न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि यह साबित नहीं हो पाया कि चंद्रास्वामी ने ही अपने वकील को 14 हजार पौंड राशि अदा की थी । ऐसी स्थिति में उनको दोषी नहीं ठहराया जा सकता और उन्हें इस मामले में बरी कर दिया गया ।

(8) स्वामी असीमानंद को भयंकर यातनाएँ
दक्षिण गुजरात के डांग जिले के वनवासी क्षेत्रों में सेवा कार्य कर रहे स्वामी असीमानंद भारत सरकार के निशाने पर थे । चर्च किसी भी स्थिति में उनको डांग से हटाना चाहता था क्योंकि इस वनवासी बहुल क्षेत्र में चर्च द्वारा चलायी जा रही अराष्टीय और असामाजिक गतिविधियों का स्वामीजी विरोध कर रहे थे । उन्हें आतंकवाद के मामले में झूठा फँसा दिया गया ।

समझौता विस्फोट मामले में स्वामी असीमानंद ने कहा था : 'यह मुझे फंँसाने का षड्यंत्र है । पुलिस मुझे प्रताड़ित कर रही है व मुझ पर गलत बयान देने के लिए दबाव बनाया जा रहा है ।'

उनको पुलिस ने घोर प्रताड़ना दी तथा धर्म भ्रष्ट किया । उनके गुप्तांग में बिजली के झटके लगाये गये तथा मुँह में गौ-मांस घुसाया गया । उन्होंने न्यायालय में निर्भीक होकर कहा कि जाँंच एजेंसियाँं धमकियों और यातनाओं से मेरे मुंँह में शब्द ठूँंस रही हैं लेकिन वे किसी भी स्थिति में मेरे शब्द न समझे जाएँं ।

सरकार ने असीमानंद पर बहुत दबाव डाला कि सरकारी गवाह बन जायें और सरकार की रणनीति के अनुसार भारत की राष्ट-वादी शक्तियों को आतंकवाद से जोड़ने की मुहिम में हिस्सेदार बनें ।

(9) स्वामी शांतीकालीजी की गोली मारकर हत्या
स्वामी शांतीकालीजी महाराज कई वर्षों से त्रिपुरा के पहाड़ी क्षेत्रों में जनजातीय समाज में शिक्षा व संस्कृति का प्रचार-प्रसार कर रहे थे । वे ईसाई मिशनरियों की धर्मांतरण की गतिविधियों में बाधक बन रहे थे । 'नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा' नामक ईसाई संगठन ने उनके आश्रम में घुसकर गोली मारकर उनकी हत्या कर दी । हत्या से पहले चर्च के आतंकवादियों ने उनसे हिन्दू धर्म छोड़कर ईसाई बनने के लिए कहा परन्तु स्वामी जी ने ईसाई बनने से मना कर दिया ।

(10) कृपालु महाराज पर लगा बलात्कार का झूठा आरोप
उत्तर प्रदेश के कृपालु जी महाराज एक सुप्रसिद्ध हिन्दू आध्यात्मिक प्रवचनकर्ता थे । उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा में इतिहास रचा है । उन पर 85 वर्ष की उम्र में सन् 2007 में त्रिनिदाद में एक 22 साल की युवती के साथ बलात्कार का आरोप लगाया गया जो कि निराधार साबित हुआ । उन्होंने जगद्गुरु कृपालु परिषद् के नाम से विख्यात एक वैश्विक हिन्दू संगठन का गठन किया था ।


(11) स्वामी रामसुखदास पर लगाये अनर्गल आरोप
स्वामी रामसुखदासजी का सम्पूर्ण जीवन गीतामय था । समाज में उन्होंने ज्ञानयोग, भक्तियोग, निष्काम कर्मयोग की त्रिवेणी बहायी । साधकों भक्तों ने उनसे प्रेरणाएँ लीं । जब रामसुखदासजी के ऊपर षड्यंत्रकारियों ने कई घिनौने आरोप लगाये थे तब उन महापुरुष ने अन्न-जल का त्याग कर दिया था जिसे देख कर उनके अनुयायी काफी दुःखी हुए तथा उन्होंने एक युक्ति निकाली कि जो भी उनके स्वामीजी की निन्दा करता उसके मुँह पर थूँकते व जूता सुँघाते । निन्दक डर गये और निन्दा बन्द कर दी । इस प्रकार निन्दा करने वालों को मुँंह तोड़ जवाब दिया । ऐसे गुरुभक्तोें को तो साधुवाद है जिन्होंने अपने स्वामीजी के विषय में कुछ भी अनर्गल सुनना पसंद नहीं किया और कुप्रचारकों को मुंँहतोड़ जवाब दिया ।


(12) निर्दोष स्वामी केशवानंद को जेल
द्वारिका के प्रसिद्ध संत स्वामी केशवानंद पर बलात्कार का झूठा आरोप लगाया गया था । साजिशकर्ता राजनेता और पुलिस अधिकारी आपस में मिल गये थे । स्वामीजी ने 12 साल की सजा में से 7 साल जेल में बिताये । सच्चाई सामने आयी, तब उन्हें निर्दोष घोषित किया गया । षड्यंत्र में शामिल पुलिस अधिकारी को चीता ने चबा डाला ।

(13) स्वामी विवेकानंद पर लगाये घृणित आरोप
स्वामी विवेकानंदजी जब अमेरिका में सनातन धर्म की महिमा गाकर भारत का गौरव बढ़ा रहे थे तब वहाँ ईसाई मिशनरियों के इशारे पर कुछ हिन्दुओं ने ही उनकी निंदा करना व कुप्रचार करनेवालों को सहयोग देना शुरू कर दिया जिनमें मुख्य थे वीरचंद गांधी और प्रतापचन्द्र मजूमदार । प्रतापचन्द्र मजूमदार ईसाई मिशनरियों की कठपुतली बन गया । 'विवेकानंदजी एक विषयलम्पट साधु, विलासी युवान और हमेशा जवान लड़कियों के बीच रहनेवाला चरित्रहीन पुरुष है' - ऐसा अमेरिका के प्रसिद्ध अखबारों में लिखने लगा । इन दुष्प्रचारकों ने विवेकानंदजी के भक्तकी नौकरानी का विवेकानंदजी के द्वारा यौन-शोषण किया गया ऐसी मनगढ़न्त कहानी भी छाप दी ।

जिस भवन में स्वामी विवेकानंदजी का प्रवचन होता उसके सामने वे लोग एक अर्धनग्न लड़की के साथ विवेकानंदजी के फोटो के पोस्टर भी लगा देते थे फिर भी स्वामी विवेकानंदजी के अमेरिकन भक्तों की श्रद्धा वे हिला न सके । प्रतापचन्द्र मजूमदार भारत आया और उनकी निन्दा करने लगा ।

विवेकानंदजी पर ठगी व अनेक स्त्रियों का चरित्रभंग करने के आरोप लगाने लगा । 'स्वामी विवेकानंदजी भारत के सनातन धर्म के किसी भी मत के साधु ही नहीं हैं' ऐसे झूठे आरोप करने लगा था ।

(14) बाबा रामरहीम पर यौनशोषण के फेंकू आरोप
सिरसा, हरियाणा के डेरा सच्चा सौदा के बाबा गुरुमीत रामरहीम सिंह समाज में सत्संग और सेवा की महक फैला रहे हैं । बाबा पर सन् 2008 में यौन शोषण का आरोप लगाकर केस चलाया गया जबकि वे निरपराध साबित हुए । उनकी बनायी एम.एस.जी. फिल्म को रोकने में हिन्दु विरोधियों ने पुरी ताकत लगा दी थी ।

(15) स्वामी अमृतानंद के मुँह में ठूँसा गौमांस
शंकराचार्य स्वामी अमृतानंद देवतीर्थ जम्मू-कश्मीर में हिन्दुओं का उत्पीड़न व पलायन रोकने, विस्थापित हिन्दुओं को न्याय व अधिकार दिलाने तथा कश्मीरी पंडितों को वापस घाटी में जाने को प्रेरित करने के कार्य में संलग्न थे । सन् 2008 में उन पर आतंकवादी होने का झूठा आरोप लगाकर उन्हें मुम्बई पुलिस ने जेल में डाल दिया । मीडिया में इनका झूठा नाम दयानंद पाण्डेय प्रचारित करवाया गया । पुलिस द्वारा इनके भगवा कपड़े नष्टकर, नग्न व गीला रखकर बिजली के झटके दिये गये । उनकी धार्मिक पुस्तकें पैरों से रौंदकर गटर में फेंक दी गईं । बेहोश होने तक मारा-पीटा गया । मुँह में गौमांस ठूँसा गया । पुलिस द्वारा अपराध स्वीकार कराने के लिए जबरदस्त दबाव बनाया गया जबकि स्वामीजी के विरुद्ध मुम्बई पुलिस के पास कोई सबूत नहीं थे फिर भी उन्हें जेल में डाल दिया गया ।

(16) 4 दिसम्बर 2005 को जगद्गुरु श्री नरेन्द्राचार्यजी महाराज का धर्मदण्ड हवाई जहाज से ले जाने पर प्रतिबन्ध लगाया गया । उस समय हवाई अड्डे पर एकत्रित हुए भक्तों को अत्यन्त भीषणता से पीटा गया ।

(17) सनातन संस्था, महाराष्ट- के संस्थापक पूज्य डॉ. जयन्त आठवलेजी बीमारी के कारण 4 वर्षों से बिस्तर पर हैं । इसके बावजूद भी उनके ऊपर समाज को भड़काने का आरोप लगाकर 8 जनवरी 2010 को पुलिस केस किया गया ।

(18) महाराष्ट- के संत ईश्वरबुवा रामदासी पर एक शराबी व्यक्ति द्वारा चरित्र हनन के आरोप लगाये गये । भूमि के विवाद का कारण लेकर कांग्रेस के एक नेता ने संत के विरुद्ध एक महिला को झूठी शिकायत लिखवाने के लिए बाध्य किया और जून 2013 को संत ईश्वरबुवा रामदासी को मध्यरात्रि को गिरफ्तार कर लिया ।

(19) आचार्य सुधांशु महाराज पर अर्थ संबंधी मिथ्या आरोप लगाये गये ।

(20) संत निगमानंद को साजिश करके मार डाला
संत निगमानंद आंदोलन के तहत 19 फरवरी 2011 से अनशन पर थे उनकी माँंग थी कि गंगा के रक्षार्थ कुम्भ क्षेत्र को खनन मुक्तरखा जाये । 68 दिनों बाद अनशन के दौरान स्वामी निगमानंद को जिला प्रशासन द्वारा जिला चिकित्सालय में भर्ती कराकर उन्हें जबरन अन्न ग्रहण कराया गया था । ऐसा कहा जा रहा है कि खनन माफिया के इशारे पर इलाज के दौरान ही संत को किसी नर्स द्वारा जहर दे दिया गया ।

(21) कोल्हापुर महाराष्ट- के संत संतोष उपाख्य बाल महाराजजी को मिरज दंगे की अवधि में पुलिस थाने में बंद कर दिया गया । लोकतंत्र के वैध मार्ग से आंदोलन करने पर भी उन पर 7 सितम्बर 2009 को पुलिस ने अपराध प्रविष्ट करने का दुःसाहस किया ।

(22) आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री रविशंकरजी पर बेंगलोर (कर्नाटक) में 10 मई 2010 को किसी अज्ञात व्यक्ति ने गोलियाँ चलाईं ।

(23) दक्षिण भारत की माता अमृतानंदमयी (अम्मा) को रेड लाइट एरिया (वेश्या घर) से संबंधित बताकर उनकी छवि को कलंकित करने का प्रयास किया गया था ।

(24) स्वामी परिपूर्णानंद महाराज को कुम्भ मेले से अगुवा किया गया था और उनका आज तक पता नहीं लगा है ।

(25) देश-विदेश में गुजरात के स्वामीनारायण सम्प्रदाय ने लोगों को संस्कारित करने का महान कार्य किया है । उनके प्रमुख संतों के खिलाफ अक्टूबर 2013 में झूठे चारित्रिक आरोप लगाये गये ।

(26) प्रख्यात सत्यसाँईं बाबा ने अनेक लोकहित की प्रवृत्तियाँ चलवाईं । साजिशकर्ताओं ने सन् 2001 में बाबा पर चरित्र हनन के मनगढ़न्त आरोप लगवाये ।

(27) दिल्ली में देश के लाखों गौभक्तों पर अंधाधुन्ध गोलियाँ 7 नवम्बर 1966, गोपाष्टमी के दिन, दिल्ली में गौहत्या बंदी कानून बनाने की माँग को लेकर 10-12 लाख गौ-भक्त नर-नारी, साधु-संत, बूढ़े, बच्चे आदि ने प्रदर्शन किया जिनके ऊपर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने प्रदर्शन खत्म कराने के लिए निहत्थे अहिंसक गौ-भक्तों, प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलवा दीं जिसमें अनेकों साधुओं व गौ-भक्तों की हत्याएँ हुईं । विधि का विधान देखिये गोपाष्टमी के दिन इन्दिरा गांधी को 31 अक्टूबर 1984 को गोलियों से भून दिया गया । अष्टमी के दिन संजय गांधी की हवाई दुर्घटना में मृत्यु व अष्टमी के दिन ही 21 मई 1991 को कोयम्बटूर में राजीव गांधी को मानव बम से उड़ा दिया गया ...।

(28) संत आसारामजी बापू व नारायण साँईं पर फर्जी केस
आध्यात्मिक क्रांति के प्रणेता संत आसारामजी बापू सनातन धर्म के सजग प्रहरी हैं । शिकागो धर्म संसद में आपने भारत का प्रतिनिधित्व किया था । मुम्बई में सभी 13 अखाड़ों के संतों ने मिलकर आपको धर्मरक्षा मंच का अध्यक्ष बनाया था । बापूजी ने समाज को अनैतिकता की ओर ले जाने वाले 'वेलेंटाइन-डे' के स्थान पर पूरे विश्व में 'मातृ-पितृ पूजन दिवस' मनाना आरम्भ करवाया । निर्धनों के लिए घरों का निर्माण कार्य किया । सतत अन्न-वस्त्र आदि के द्वारा बड़े पैमाने पर गरीबों की मदद करते रहे । गौ-संवर्धन हेतु अनेकों गौशालायें बनवायीं । संस्कार धरोहर को सुरक्षित रखने हेतु अनेकों गुरुकुलों की स्थापना की । 17,000 से अधिक निःशुल्क 'बाल सस्ंकार केन्द्र' भी चलाये जा रहे हैं । 1,300 श्री योग वेदांत सेवा समितियाँ समाज उत्थान के विविध सेवाकार्यों में संलग्न हैं । 400 से अधिक आश्रम हैं । बापूजी के साधकों की संख्या 5 करोड़ से भी अधिक बतायी जाती है । पिछले 50 वर्षों से उन्होंने करोड़ों लोगों को जीवन जीने की सही राह दिखाई है । उनके अनुयायी विश्व के कोने-कोने में फैले हुए हैें और भक्तों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही थी। हिन्दुओं का ईसाईकरण करने के विरुद्ध जागृति लाकर उन्होंने हिन्दुआें के धर्म परिवर्तन को रोका ।

पिछले कई वर्षों से सोनिया सरकार, ईसाई मिशनरियों, बहुराष्टीय कम्पनियोें, बिकाऊ मीडिया और असामाजिक तत्त्वों के निशाने पर संत आसारामजी बापू थे । वेटिक न पोप और सोनिया-राहुल के इशारे पर कांग्रेसी नेताओं तथा वकीलों ने शाहजहाँपुर (उ.प्र.) की लड़की व उसके पिता को तैयार कर उन पर यौन शोषण के झूठे आरोप लगवाये । 75 वर्षीय निर्दोष संत को 31 अगस्त 2013 अर्धरात्रि को धोखे से गिरफ्तार कर जोधपुर जेल में डाल दिया गया । जोधपुर शहर में बापूजी के प्रेमी भक्तों के प्रवेश पर सरकार द्वारा रोक लगा दी गई । आ रहे भक्तों को पुलिस ने बुरी तरह मारा-पीटा । जेल में बापूजी को तरह-तरह से हैरान व परेशान किया जा रहा है । उन्हें आवश्यक आयुर्वेदिक चिकित्सा भी कई महीने तक मुहैया नहीं करायी गई । बापूजी के बारे में मीडिया ने कई महीनों से लगातार कई-कई घंटे झूठी मनगढ़न्त कहानियाँ दिखायीं व समाज को गुमराह करने का अपराध किया ।

समाज उत्थान में रत बापूजी के सुपुत्र श्री नारायण साँईं को भी एक झूठे मामले में फँसाकर सूरत जेल में डाल दिया गया है । बापूजी के आश्रमों के संचालकों एवं साधकों को झूठे केसों में फँसाया जा रहा है। जंतर-मंतर में शांतिपूर्ण आंदोलन करने वाले भक्तों पर पुलिस ने अमानवीय तरीके से लाठी प्रहार किया । पुरुष पुलिस द्वारा महिलाओं के वस्त्र फाड़ डाले गये । पुलिस द्वारा आश्रम में रहने वाले अंतेवासियों को प्रताड़ित किया गया । बापूजी की धर्मपत्नी श्रीमती लक्ष्मीदेवी तथा उनकी सुपुत्री भारतीदेवी पर भी घिनौने आरोप लगाये गये । यह सब अंतर्राष्टीय साजिश के तहत हो रहा है । निर्दोश संत पर आरोप लगाने वाली महीला ने कबूल किया कि हमने दबाव में आकर वलात्कार के झूठे आरोप लगाये ।

(29) बाबा जयगुरुदेव जेल में...भक्तों ने किया जेल भरो आंदोलन
मथुरा के बाबा जयगुरुदेव धर्म प्रचार में सतत लगे रहे और उन्होंने समाज को शाकाहारी बनने की प्रेरणा जोर-शोर से दी । इन्दिरा सरकार ने 1973-74 में नसबंदी का अभियान चलाया व अनेक अत्याचार जनता पर किये तो बाबा ने सरकार के खिलाफ आवाज उठायी । जून 1975 से मार्च 1977 तक 21 माह बाबा को इंदिरा गांधी सरकार ने बिना कारण बताये अलग-अलग 4 जेलों में रखा । जेल में उन्हें हथकड़ी और बेड़ी के साथ तन्हाई में कठोर यातनायें दी गईं । 20-20 घंटे तक कोठरी में ताला लगा कर बंद रखते थे । रोटी कच्ची व दाल अधपकी देते थे । बीमार होने पर दवाई भी नहीं देते थे । उस समय बाबा की संस्था 'जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संघ' पर सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया ।
तिहाड़ जेल में उच्च अधिकारियों ने बाबा को कहा कि आप चुनाव में कांग्रेस का समर्थन कर दीजिये तो आप को कुछ ही घंटों में छोड दिया जायेगा । प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से सुलह कर लीजिये, उनकी प्रशंसा कर दीजिये । बाबा ने कहा कि मैंने तो कोई गुनाह नहीं किया है तो फिर कैसी सुलह कर लूँ । इन्दिरा की बर्बर सरकार ने उनके 14,000 प्रेमी भक्तों को जेलों में ठूंस दिया । बाद में पुलिसवाले मार-पीटकर भक्तों को जंगलों में छोड़ आते थे । वे मार खाकर भी फिर वही आवाज लगाते कि हमारे बाबाजी को छोड़ो वर्ना हमको भी जेल दे दो । भक्तों द्वारा किये गये जेल भरो आंदोलन के बाद बाबा जयगुरुदेव को रिहा किया गया ।
(30) 'भक्ति निकेतन आश्रम' आंणद (गुज.) के सच्चिदानंदजी महाराज को हत्या के आरोप में प्रताड़ित किया गया । साढ़े सात साल बाद अदालत ने उन्हें 30 जनवरी 2014 को निर्दोष बरी किया ।

जनता की आवाज
कुछ शक्तिशाली लोग हैं जो परदे के पीछेे से हिन्दू धर्म, साधु-संन्यासियों और धार्मिंक स्थलों को बदनाम करने में लगे हुए हैं । - पी. परमेश्वरन (अध्यक्ष विवेकानंद केन्द्र , कन्याकुमारी)

राजनैतिक षड्यंत्र के तहत् ही हिन्दू आस्था, मानबिन्दुओं व हिन्दू संतों पर कुठाराघात किया जा रहा है । मठ -मंदिरों में सरकार कब्जा जमाने का प्रयास कर रही है । - शंकराचार्य श्री निश्चलानंद सरस्वती (जगन्नाथपुरी)

अगर संतों को जेल में डालकर बदनाम करने का षड्यंत्र होता रहा तो भारत की अस्मिता, भारत की संस्कृति सुरक्षित नहीं रह पायेगी । - शंकराचार्य श्री नरेन्द्रानन्द सरस्वती (काशी सुमेरु पीठ )

षड्यंत्रों का एकमात्र उद्देश्य होता है हिन्दू समाज के श्रद्धा केन्द्र हिल जाएं । - चम्पत राय (महामंत्री विहिप)

झूठे आरोपों व कुप्रचार के माध्यम से तुम्हारे मार्गदशक व संत योजना बद्धरीति से समाप्त कर दिये जायेंगे । अतः सावधान! - सुब्रमण्यम स्वामी

साधु-संत हमारे जीवन की धरोहर हैं और हम सबको मिलकर प्रयास करना है कि इस धरोहर को कभी कोई आँच न आये । - सुरेन्द्र पाल (द्रोणाचार्य, धारावाहिक महाभारत)

भारत के लिए सर्वाधिक संकट यही होगा कि वह अपने धर्म से वंचित हो जाये । भारत ही भारत को बचा सकता है तथा भारत और हिन्दू धर्म एक रूप है । हिन्दू धर्म के बिना भारत का कोई भविष्य नहीं । - डॉ. एनी बेसेन्ट

मैं ईसाई धर्म को एक अभिशाप मानता हूँ, उसमें आंतरिक विकृति की पराकाष्ठा है । वह द्वेषभाव से भरपूर वृत्ति है । इस भयंकर विष को कोई मारण नहीं । ईसाईयत गुलाम, क्षुद्र और चांडाल का पंथ है । - फिलॉसफर नित्शे

हिन्दुत्व सदा बहने वाला (बारहमासी) दर्शन है जो कि सभी धर्मों का केन्द्र है। - अलड्स हक्सल

ईसाई पादरियों द्वारा यौन शोषण की होड़
सूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी के अनुसार सिर्फ केरल में 63 पादरियों पर बलात्कार, हत्या, अवैध वसूली और हथियार रखने के मामले विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज हैं ।

लळीहेरिलर्लेीपींरलळश्रळीूं.ेीस कैथोलिक लोगों की एक ऑनलाइन संग्रह के अनुसार चर्चों के खिलाफ 3,000 से भी अधिक मुकदमें दायर किये गये हैं जिसमें कइयों का निबटारा कई लाख डालर मुआवजा दे कर किया गया । 1998 में डालास के रोमन कैथोलिक डाईओसिज द्वारा उस समय 3.09 करोड़ डालर सिर्फ एक पादरी के 12 यौन शिकारों को मुआवजे के रूप में दिया गया । सन् 2003 से 2009 तक अन्य बड़े निबटारों में 375 मामलों के तहत 1551 दावेदारों/शिकारों को 1.1 अरब डालर मुआवजे के रूप में दिया गया । 1950 से 2007 तक यौन उत्पीड़न के मामलों के निपटारों में 2 अरब डालर से अधिक मुआवजा दिया गया । सन् 2012 तक इस मद में 3 अरब डालर से भी अधिक रकम खर्च की गई ।

पेरिस (फ्रांस) में एक वेश्या ने इसलिए एक पादरी का लिंग चबा डाला क्योंकि पादरी ने पूर्व निश्चित फीस नहीं चुकाई और अपने पादरी साथी सहित वेश्या से बार-बार यौनानंद लिया । मई 2009 में प्रकाशित 'रायन रिपोर्ट' ने 9 वर्ष के अध्ययन के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि 30,000 बच्चों को ईसाई संस्थाओं में ईसाई ननों और पादरियों के द्वारा प्रताड़ित व शोषित किया जाता रहा । पादरियों द्वारा किये गये यौन-शोषण के अपराधों के लिए वर्तमान पोप बेनेडिक्ट को क्षमा-याचना करनी पड़ी थी ।
सन्दर्भ :

पथिक संदेश-जन.2014, सृजन कर्म-नवम्बर 2013, हिन्दू वॉइस-दिस. 2013, पांचजन्य 8 दिस.2013 व 12 जन. 2014, सनातन प्रभात अक्टूबर 2013, अजान-अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, दैनिक जागरण, राजस्थान पत्रिका इत्यादि ।